क्वेश्चन ओं कि चीन के पूर्वोत्तर इलाके में पड़ने वाली झारखंड झील जमकर बर्फ हो गई है कि यह दिसंबर की बात है और यहां तापमान माइनस 26 डिग्री है अंदाजा लगाइए कि यह क्या हो रहा है है यह घोड़े बर्फीली झील से मछलियों से भरे जा खींच रहे हैं जमी हुई झील से मछलियां पकड़ने का यह तरीका यहां सदियों से चला आ रहा है 11 दिनों के भीतर यहां से साढे चार सौ टर्न मछलियां निकाली गई यहां खुले में ही इन मछलियों का बाज़ार लगता है और हर दिन दसियों हजार मछलियां हाथों-हाथ बिक जाती हैं जो लोग यहां नहीं आ पाते वह मछलियां ऑनलाइन खरीद देते हैं ताजे पानी की झील में पलने वाली मछलियों को मछलियों के शौकीन क्यों छोड़ना चाहेंगे कि है तो देखा आपने कैसे जमी हुई झील से मछलियों को पकड़ा जा रहा है मछलियों के बिना बहुत से लोगों का काम नहीं चलता दुनिया भर में लगभग तीन अरब लोगों के लिए मछलियां और समुद्र में पलने वाले जीव प्रोटीन का बुनियादी स्रोत हैं यह कहना है विश्व बनने कुश का या व्यस्क का इंसान हजारों साल से मछली पकड़ते और खाते रहे हैं अब तो अच्छे पोषण के लिए डॉक्टर भी हफ्ते में दो बार मछली खाने की सलाह देते हैं लेकिन बीते कुछ दशकों में हमने इतनी मछलियां पकड़ी हैं कि महासागर खाली होने लगे हैं इसी को ओवरफिशिंग कहते हैं यानी जरूरत से ज्यादा मछली पकड़ना कि संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट कहती है कि 2018 में दुनिया भर में मछलियों का कुल उत्पादन हम 17.9 करोड़ टन रहा इनमें से 8.2 करोड़ रिटर्न मछलियां एक्वाकल्चर योनि फिश फार्मों में पैदा की गई जबकि बाकी महासागरों नदियों और झीलों से पकड़ी गई समंदर से पकड़ी जाने वाली मछलियों की मात्रा साल दर साल बढ़ती जा रही है कि 1950 में जहां दो करोड टन मछली और समुद्री जीव पकड़े जाते थे वहीं 1990 में यह आंकड़ा बढ़कर आठ करोड़ टन हो गया फिलहाल यह 9 से 10 करोड़ टन के बीच है मछलियां पकड़ने कोई बुरी बात नहीं है महासागरों को इससे कोई नुकसान नहीं होता लेकिन समस्या यह है कि हम इतनी मछलियां भी समंदर में नहीं छोड़ रहे हैं कि वह प्रजनन करके अपनी संख्या को एक निश्चित स्तर पर बनाए रखें यही नहीं मछलियां पकड़ने वाले जाल कई बार इतने बारीक होते हैं कि उनमें छोटी-छोटी मछलियां भी फंस जाती हैं यानी प्रजनन की उम्र तक पहुंचने से पहले ही वह मारी जाती हैं है इसके अलावा कई ऐसे जीव भी जाल में फंस रहे हैं जिनकी मछुआरों को जरूरत नहीं होती जैसे कि कछुए और दूसरी मछलियां इसे बायोगैस कहते हैं हर साल औसतन तीन करोड टन मछलियां अंत में बायो स्केच की श्रेणी में आती हैं में रैप कानूनी स्टिचिंग भी एक बड़ी समस्या है यानी उससे कहीं ज्यादा मछलियां पकड़ी जा रही हैं जितनी कोटे के तहत निर्धारित हैं कि दुनिया भर में मछलियों का बाज़ार सैकड़ों अरब डालर का है और इसमें ज्यादा से ज्यादा हिस्सेदारी हासिल करने के लिए अलग-अलग देशों के बीच खींचतान बिल्कुल मछली बाजार जैसी है सरकारें अपने फिश इन कंपनियों को खूब सब्सिडी देती हैं और कंपनियों का ध्यान ज्यादा से ज्यादा मछलियां पकड़ने पर और मुनाफा कमाने पर होता है यही समस्या की जड़ है और इसी से ओवरफिशिंग होती है विश्व व्यापार संगठन यानी डब्ल्यूटीओ 20 साल से कोशिश कर रहा है कि जिन कंपनियों को मिलने वाली सब्सिडी पर रोक लगे लेकिन अभी तक विभिन्न देशों के बीच इस बारे में सहमति नहीं बनी है फिशिंग के लिए सबसे ज्यादा सब्सिडी चीन देता है उसके बाद इस सूची में यूरोपीय संघ अमेरिका दक्षिण कोरिया और जापान का नाम आता है चीन अतीत में इस बात का विरोध करता रहा है कि उसके फिशिंग जहाजों को रोका जाए कि सब्सिडी पर रोक लगाने का दारोमदार बहुत हद तक चीन पर है चीन का कहना है कि वह इस बारे में जारी कोशिशों का हिस्सा बना रहेगा यूरोपीय देशों के साथ-साथ जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश भी सब्सिडी पर रोक के हक में हैं है कुल मिलाकर मामला अभी तक कूटनीति में फंसा है लेकिन तुरंत कदम उठाने होंगे सवाल यहां यह महासागरों में मौजूद मछलियों को ओवरफिशिंग से बचाने का है ओवरफिशिंग की वजह से ना सिर्फ महासागरों का इको सिस्टम तहस नहस हो रहा है बल्कि इसकी वजह से एक दिन करोड़ों लोगों के सामने खाने का संकट भी पैदा हो सकता है बहुत सारे लोगों की रोजी-रोटी जा सकती है इसलिए एक ऐसे सस्टेनेबल तरीके की जरूरत है जिससे मछली खाने वालों की थाली भी बड़ी रहे और मछलियों से महासागर भी और फैशन पर सरकारों के बीच होने वाली खींचतान से पहले आप अपने स्तर पर कोशिश कर सकते हैं जैसे कि आपको पता होना चाहिए कि कौन से सीजन में कौन सी मछली खानी है और कौन सी नहीं इस बारे में अगर आप ज्यादा जानकारी चाहते हैं तो जरूर देखें हमारा एक वीडियो जिसका लिंक हम आपको कमेंट बॉक्स में या फिर डिस्क्रिप्शन मैं इसमें दे रहे हैं आज का वीडियो आपको कैसा लगा हमें जरूर बताएं आपकी प्रतिक्रियाओं का हमें बेसब्री से इंतजार रहता है आपका बहुत-बहुत धन्यवाद अ