हिंदी में यूपीएससी की तैयारी से संबंधित प्रोग्राम्स को देखने के लिए सब्सक्राइब करें स्टडी आईक्यू आईएस हिंदी दोस्तों हाल ही में फुकरे तीन रिलीज हुई लोगों ने इसे खूब पसंद भी किया चूचा के चुटकुले के अलावा इस फिल्म में दिल्ली का एक ज्वलंत मुद्दा उठाया गया पानी की किल्लत यह फिल्म आपको डे जीरो की भयानक कल्पना तक ले जाती है डे जीरो से मतलब है जब हर तरह का पानी बिल्कुल खत्म हो जाएगा लेकिन असल में यह कहानी सिर्फ दिल्ली की नहीं बल्कि पूरे भारत की है नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र गुजरात कर्नाटक झारखंड आंध्र प्रदेश पंजाब और दिल्ली जैसे राज्यों को साल 2018 से गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ रहा है 1.4 अरब की आबादी के साथ आज भारत दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देशों में शुमार है और इतनी बड़ी आबादी में अधिकांश लोगों के पास पीने का साफ पानी नहीं है ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आखिर यह राज्य जल संकट में इस कगार पर क्यों पहुंचते जा रहे हैं और इस सूखे की मार से देश को बचाने के लिए सरकार क्या कर रही है आज इस वीडियो में हम इन्हीं सब सवालों को समझेंगे यह वीडियो यूपीएससी मेंस के जीएस पेपर तीन के पर्यावरण खंड के लिहाज से अहम है वे राज्य जहां पानी खत्म होने की कगार पर हैं दोस्तों धरती पर मौजूद कुल पानी का 97 पर हिस्सा समुद्र में है सिर्फ 3 पर हिस्सा ही फ्रेश वाटर यानी मीठे पानी का है इसमें से भी 2.4 पर ग्लेशियर उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव में पाया जाता है अब बचता है 0.6 पर जो कि नदियों झीलों और तालाबों में है लेकिन आज नदियां इस कदर प्रदूषित हैं इस बात को कौन नहीं जानता ट्रिब्यून इंडिया की रिपोर्ट की माने तो भारत की 46 पर नदियां प्रदूषित हैं यही वजह है कि देश की 80 पर जनता जहरीला पानी पीने को मजबूर है इसके अलावा देश के कुछ हिस्से ऐसे भी हैं जहां लोगों को पीने का पानी तक नसीब नहीं होता यहां प्राकृतिक जल संस साधन पूरी तरह सूख चुके हैं भारत में सात ऐसे राज्य हैं जो गंभीर जल संकट से गुजर रहे हैं आइए जानते हैं उन सात राज्यों के बारे में जहां जल संकट चरम पर है इसमें सबसे पहला है महाराष्ट्र जो आज अभूतपूर्व स्तर पर जल संकट का सामना कर रहा है जलाशयों बांधों और भूजल के अत्यधिक दोहन की वजह से भूजल सर्वेक्षण और विकास प्राधिकरण यानी जीएसडीए ने यहां रहने वाले लोगों को चेतावनी दी है यहां साल 2016 से लगातार बारिश में आई है जिस वजह से यहां के 761 गांव प्रभावित हुए हैं इसे लेकर महाराष्ट्र सरकार ने भूजल विकास और प्रबंधन अधिनियम और जल निकासी विनियमन भी लागू किया है लेकिन इसका क्रियान्वयन सही से ना होने की वजह से कोई बदलाव देखने को नहीं मिला और आज भी महाराष्ट्र के करीब 151 गांव पानी की भारी कमी से जूझ रहे हैं वहीं बात करें गुजरात की तो आज गुजरात के पास सिर्फ 2 पर जल संसाधन हैं जबकि यहां देश की करीब 5 पर आबादी रहती है इन संसाधनों में भी लगातार आती कमी की वजह से यह संकट और भयानक रूप लेता जा रहा है आज गुजरात के 14 जिलों में 500 से ज्यादा गांव सिर्फ टैंकरों के पानी पर निर्भर हैं पानी के संकट की स्थिति सौराष्ट्र कच्छ और उत्तरी गुजरात में और ज्यादा खराब है इसके अलावा कर्नाटक में जल संकट एक तरफ गंभीर कृषि संकट पैदा कर रहा है वहीं दूसरी तरफ घरेलू पानी की कमी भी हो रही है आज कर्नाटक के 30 जिलों में करीब 1900 गांव सूखे की मार झेल रहे हैं अगले राज्य की बात करें तो आज आधा झारखंड सूखा है इसमें भी कोडर्मा खूंटी और गढ़वा जिले की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है सरकार भी यहां पीने का पानी उपलब्ध कराने में असफल रही है इसी तरह आंध्र प्रदेश भी आज अपने लोगों को साफ पीने का पानी उपलब्ध कराने में असफल हो रहा है यहां पीने के पानी की गुणवत्ता इतनी खराब है कि हर साल सैकड़ों लोग सिर्फ गंदा पानी पीने की वजह से बीमार पड़ जाते हैं आंध्र प्रदेश के बांध और नदियां भी पूरे राज्य को पीने का पानी उपलब्ध कराने में पर्याप्त नहीं है जब बात राजस्थान की होती है तो समस्या और बड़ी दिखती है एक औसत दशकीय अध्ययन से पता लगता है कि नवंबर 2008 से नवंबर 2018 तक राजस्थान के भूजल स्तर में करीब 62.7 पर की गिरावट देखने को मिली यहां गांव वाले ना अपने लिए और ना ही अपने जानवरों के लिए पानी की व्यवस्था कर पा रहे हैं इसी तरह दोस्तों उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड मथुरा और अलीगढ़ जैसे क्षेत्र हैं जहां के तालाब गायब हो गए हैं और हैंड पंप पूरी तरह से सूख चुके हैं इसके अलावा देश के तीन प्रमुख शहर बेंगलुरु दिल्ली चेन्नई भी पानी की भारी कमी से जूझ रहे हैं बेंगलुरु में कावेरी बेसिन के हाल बुरे हैं जल संकट का सामना शहर के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों के लोगों को ज्यादा करना पड़ रहा है आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक बेंगलुरु में करीब 9294 बोरवेल हैं इनमें से 17 1893 बोरवेल पानी की कमी की वजह से काम नहीं करते चेन्नई भी आज भयावह जल संकट का सामना कर रहा है यहां चार जलाशय हैं जो ज्यादातर जलापूर्ति का काम करते हैं लेकिन अब यह पूरी तरह से सूख चुके हैं जिस वजह से यहां के लोग घंटों नगर निगम या निजी टैंकरों से पानी लेने के लिए लाइन लगाकर खड़े रहते हैं देश की राजधानी दिल्ली भी जल संकट से नहीं बच पाई है 2017 के आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट की माने तो दिल्ली में करीब 20 पर पीने का पानी कुप्र बंधन की वजह से बर्बाद हो जाता है दिल्ली के 18 पर घरों में आज भी पाइप से पानी की आपूर्ति नहीं हो सकी है ऐसे में आइए समझते हैं कि यह राज्य जल संकट की इस स्टेज तक कैसे पहुंचे जैसा कि हमने शुरुआत में बताया कि हमारे देश भारत में करीब 200 से ज्यादा नदियां हैं पीने के पानी का पहला स्रोत भी यह नदियां ही हैं जो कितना प्रदूषित है यह हम देख चुके हैं इसके अलावा देश में पीने के पानी का दूसरा मुख्य स्रोत भूजल है ग्राउंड वाटर या भूजल वो पानी है जो चट्टानों और मिट्टी से रिस जाता है और जमीन के नीचे जमा हो जाता है आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत में नदियां तालाब और भूजल के जरिए पानी की उपलब्धता करीब 2300 अरब घन मीटर से ज्यादा है साथ ही देश में सालाना औसत वर्षा 100 सेंटीमीटर से भी ज्यादा है ऐसे में आपका भी सवाल होगा कि इसके बावजूद भी पानी की इतनी कमी कैसे दोस्तों बारिश के पानी में से 47 पर हिस्सा यानी 18690 क्यूबिक मीटर पानी नदियों में जाता है अब इसमें से 1132 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी का इस्तेमाल किया जा सकता है भारत में जल प्रबंधन की उचित योजना ना होने की वजह से बारिश का पानी बर्बाद हो जाता है इसके अलावा भूजल भी रिचार्ज नहीं हो पा रहा है क्योंकि आज हर जगह कॉंक्रीट की इमारतें हैं जिससे पानी का रिसाव कम हो पाता है लेकिन ऐसी बात नहीं है कि इसे लेकर कभी बड़े स्तर पर कोई कोशिश नहीं की गई दरअसल साल 2016 में दिल्ली हाई कोर्ट ने एक केस की सुनवाई करते हुए जरूरी फैसला सुनाया था कोर्ट ने कहा था कि मकान हो या सोसाइटी सभी के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग डिवाइस लगवाना अनिवार्य होगा और ऐसा ना करने वालों से पानी की ज्यादा कीमत वसूली जाएगी हालांकि इस फैसले पर कितना अमल हुआ इसके गवाह तो हम सब हैं ही दोस्तों आज देश में जल संकट कितना गंभीर हो चुका है यह नीति आयोग की कंबाइंड वाटर मैनेजमेंट इंडेक्स की रिपोर्ट से पता चलता है इसके मुताबिक देश के 21 शहर जीरो लेवल ग्राउंड वाटर पर पहुंच रहे हैं अगर ग्राउंड वाटर को जीरो लेवल पर पहुंचने से रोका नहीं गया और इसे ठीक नहीं किया गया तो शहर में रह रहे करीब 10.5 करोड़ लोगों को पीने के पानी का अकाल झेलना होगा आज दुनिया में भूजल का सबसे ज्यादा उपयोग करने वाले 10 देशों में आठ एशिया के हैं दो देश उत्तरी अमेरिका के हैं धरती के लगभग 75 पर भूजल का इस्तेमाल इन देशों में ही हो रहा है इनमें भारत सबसे ऊपर है भारत में खेती की सिंचाई के लिए करीब 89 पर भूजल का इस्तेमाल किया जाता है देश की 48 पर आबादी खेती पर निर्भर है फसल की सिंचाई के लिए आमतौर पर ज्यादातर ट्यूबवेल का सहारा लिया जाता है जिस वजह से पानी का स्तर लगातार नीचे जा रहा है अगर यह समस्या डे जीरो पर पहुंच जाती है तो फसल उत्पादन में दिक्कत होगी जिससे देश में खाद्य संकट खड़ा हो जाएगा भारत में जल आपूर्ति और व्यवस्थित जल वितरण नहीं होने से क्षेत्रीय स्तर पर भी काफी असमानता है देश के अलग-अलग शहरों में प्रति व्यक्ति पानी की जरूरत और उपलब्ध ता अलग-अलग है इसी तरह पानी की खपत में भी बड़ी असमानता दिखाई देती है आपको बता दें कि भारत सरकार ने शहरों में रहने वाले लोगों के लिए प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 135 लीटर पानी की आवश्यकता तय की है जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह केवल 55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन है लेकिन इस पर डब्ल्यू एओ का अलग ही मानना है डब्लू एओ के मुताबिक हर व्यक्ति के लिए प्रतिदिन 25 लीटर पानी ही काफी है इसके उलट अगर दिल्ली का हाल देखें तो यहां हर रोज एक इंसान करीब 200 272 लीटर पानी की खपत करता है आपको जानकर हैरानी होगी कि दुनिया भर में जो पानी के उपयोग की सीमा तय की गई है उसमें यह सबसे ज्यादा है वैज्ञानिकों का दावा है कि भूमि का जल पुनर्भरण ना हो पाने के कारण जमीन की नमी खत्म हो रही है जिस वजह से सूखापन बढ़ता जा रहा है भूवैज्ञानिक हलचल और पानी में जैविक कचरे से निकलने वाली मिथेन और दूसरी गैसें भी जमीन की सतह पर अचानक गर्मी को बढ़ा रही हैं दोस्तों अब जब समस्या इतनी बड़ी है तो यह भी जानना जरूरी है कि सरकार का इसे लेकर क्या रुख है भारत सरकार लगातार जल संकट से निपटने की तैयारी में लगी है फिलहाल सरकार हर घर जल प्रोजेक्ट को साल 2024 तक पूरा करने में जुटी है योजना के तहत केंद्र सरकार ने साल 2024 तक हर ग्रामीण घर में पानी की आपूर्ति का लक्ष्य रखा है 2019 में शुरू हुई इस योजना के लक्ष्य का 56.4 पर काम पूरा हो चुका है जनवरी 2023 तक नल के पानी के कनेक्शन तक पहुंच रखने वाले ग्रामीण परिवारों की संख्या बढ़कर 108.5 मिलियन हो गई है इसके अलावा जल संकट से निपटने के लिए भारत सरकार ने साल 2019 में अटल भूजल योजना एक राष्ट्रीय भूजल कार्यक्रम भी लॉन्च किया आपको बता दें कि यह दुनिया का सबसे बड़ा भूजल संरक्षण कार्यक्रम है जिसे सात राज्यों के 8220 ग्राम पंचायतों में लागू किया गया है साथ ही सरकार ने 50 हज जल निकायों का निर्माण करने का फैसला लिया है इस प्रोजेक्ट का नाम है अमृत सरोवर यह 24 अप्रैल 2022 को लॉन्च किया गया था इसे लेकर सरकार काफी आशावादी है प्रोजेक्ट में हर वाटर बॉडी एक एकड़ की होगी जिसमें 10000 क्यूबिक मीटर वाटर होल्ड किया जा सकेगा सरकार ने जल संरक्षण पर केंद्रित जल शक्ति अभियान भी लॉन्च किया है दोस्तों जल शक्ति अभियान की शुरुआत साल 2019 में कैच द रेन वेनेट फॉल्स की थीम के साथ हुई थी यह प्रोजेक्ट शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षा जल संरक्षण पर केंद्रित है प्री मानसून और पोस्ट मानसून के दौरान रेन वाटर का सही इस्तेमाल किया जाता है इसी तरह कुशल सिंचाई को बढ़ावा देने के लिए भी सरकार ने कई कदम उठाए इनमें प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना मुख्य है यह प्रोजेक्ट साल 2015-16 में लॉन्च किया गया था जिससे किसानों तक पानी पहुंच सके और खेती में पानी का अनुकूलित उपयोग हो सके ऐसी सरकारी योजना पानी की समस्या को हल करने में कारगर साबित हो सकती है बस हमें समझना यह है कि पानी की कमी एक बड़ी समस्या है और इसके लिए लगातार और व्यापक प्रयास की जरूरत है राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस दिशा में कुछ सफल प्रयासों से हम सीख जरूर सकते हैं ऐसे ही एक केस स्टडी के बारे में हम जानते हैं दोस्तों भारत का ओड़ीशा राज्य भी कुछ साल पहले तक पानी की कमी सूखा बाढ़ अनाज की कमी जैसी समस्याओं का सामना कर रहा था लेकिन सरकारी योजनाओं और स्थानीय लोगों की मदद से ओड़ीशा का भूजल दोहन 2013 से 2017 के बीच 42 पर से घटकर 30 पर तक पहुंच गया बारिश के पानी का खेती में सही इस्तेमाल माल से लेकर ग्राउंड वाटर रिचार्ज तक ओड़ीशा ने जल प्रबंधन में शानदार काम किया है यह तो रही बारिश के पानी का उपयोग कर जल संकट से निपटने की बात लेकिन भारत में ऐसे राज्य हैं जहां बारिश ही बहुत कम होती है ऐसे राज्य जल संकट से निपटने के लिए इजराइल का मॉडल अपना सकते हैं दोस्तों साल 2015 तक इजराइल तेजी से बढ़ती जनसंख्या का सामना कर रहा था जिस वजह से जल की मांग और उपलब्ध प्राकृतिक जल आपूर्ति के बीच 1 बिलियन क्यूबिक मीटर का अंतर आ गया था पूरे देश में पे जल का संकट पैदा हो गया था ऐसे में इजराइल ने बड़े पैमाने पर अपशिष्ट जल का पुनः उपयोग और समुद्री जल के अलव करण की मदद ली इसमें बड़ी भूमिका प्रभावी नियमन की रही इनकी मदद से ही इजराइल मीठे पानी के संसाधनों का ओवर एक्सप्लोइटेशन कम कर पाया साल 2012 में इजराइल ने जल क्षेत्र के लिए नेशनल लॉन्ग टर्म मास्टर प्लान लॉन्च किया आज इजराइल रिसाइकल वाटर का सबसे बड़ा उपयोग करता है तकरीबन 87 पर अपशिष्ट जल कृषि के लिए इस्तेमाल किया जाता है एडवांस रिवर्स ऑस्मोसिस टेक्नोलॉजी और बेहतर इंजीनियरिंग प्रक्रिया के साथ इजराइल के पांच अलव मीकर संयंत्र दुनिया के सबसे कुशल संयंत्र हैं इन्हीं पर देश की करीब 80 पर घरेलू शहरी जल आपूर्ति निर्भर है दोस्तों जल संकट अब कोई भविष्य की बात नहीं रह गई है आज देश के बहुत से हिस्सों में यह हकीकत है और अगर ऐसा ही चलता रहा तो आने वाले समय में देश का एक बड़ा हिस्सा इसकी चपेट में होगा इसलिए जरूरी है कि समय रहते इस के लिए कदम उठाए जाएं सरकार तो अपनी तरफ से प्रयास कर ही रही है इसके साथ ही हमें भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और जल संसाधनों के कुशल उपयोग पर ध्यान देना होगा आज के समय में पानी को बर्बाद करना तो पाप के बराबर है जिससे किसी भी हाल में हमें बचना होगा हिंदी में यूपीएससी की तैयारी से संबंधित प्रोग्राम्स को देखने के लिए सब्सक्राइब करें स्टडी आईक्यू आईएस हिंदी [संगीत]